Description
बैशाख शुक्ल चतुर्दशी के दिव्य चार महाशक्तियों के जयंती पर्वकाल में भगवान कोलाहल नृसिंह का बड़वानल पाठ आवृत्ति, भगवती छिन्नमस्तिका का आवरण पूजन तंत्रोक्त, आगमोक्त प्रत्यंगिरा पूजन सहित प्रत्यंगिरा संपुट नवचंडी पाठ व भगवान शरभेश्वर की कृपा प्रसन्नता हेतु 9 ब्राह्मण द्वारा रुद्राभिषेक आदि काशी महाश्मशान तथा विंध्याचल त्रिकोण क्षेत्र में पूर्ण की जायेगी।
इसी क्रम में भगवान नृसिंह जो हमारे मुख्य द्वार के चौखट के प्रमुख देवता हैं, उनके अष्टदशाक्षरी सिद्ध रक्षण मंत्र द्वारा तंत्रोक्त कील अभिमंत्रण किया जायेगा। तथा हवन कुंड में कुंड वास्तु अनुसार सिद्ध कोण में स्थापित कर समस्त हवन कर्म संपादित होगा। प्रसाद सहित एक कील आपको अगले 15 दिनों में भेजा जायेगा।
प्राप्त होने पर रविवार के दिन उस कील को पुनः स्वयं गोदुग्ध से अभिषेक कर उसपर इत्र व चंदन का लेपन कर, पीले कपड़े में लपेटकर। घर के मुख्य द्वारा के बाहर गड्ढा करके गाड़ देना है। तथा ऊपर से मिट्टी सीमेंट आदि से ढक देना है।
संभव हो तो प्रतिदिन उस स्थान पर लगातार 41/21/11/7 (अथवा 9 ) दिन तक एक नींबू नृसिंह भगवान के नाम से काट कर बलि प्रदान करें तथा उसपर कपूर प्रज्ज्वलित करें। कील गाड़ने से पूर्व क्षेत्र पाल निकारी कर लें तो अति उत्तम अथवा एक पानी वाला नारियल को धोकर उस पर एक कपूर जला कर पूरे घर में जला कपूर नारियल समेट घुमाकर बाहर लाकर फोड़ दें तब गृह बंधन करें। यह कपूर नारियल भगवान क्षेत्र पाल भैरव जी के नाम से रहेगा।


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