Grihasth Tantra

विंध्य स्थानं विंध्य निलयां विंध्य पर्वत वासिनी।
योगिनी योगमयां त्वां चंडिके प्रणमाम्यहं।।

तंत्र घटनाएं

वज्र कवच और पिशाच भाग – 02

रक्षक ने बेहुदगी से आवाज लगाकर सभी को बाहर निकलने कहा। और उल्टा सीधा बोलने लगा। बालक बस एक हुंकार के साथ उस ओर देखा जहां से अनर्गल विषय बोला जा रहा...

श्री रुद्रांश-वाणी

प्रकृति के मध्य तंत्र स्थान

विधान का पालन हुआ। बताये गये समय पर चिताभूमि थपर स्थित भगवती सती के हृदयपीठ पर विराजमान भगवान शिव के महा ज्योतिर्लिंग वैद्यनाथ धाम...

साधना सर्वस्व

चौंसठ योगिनी विशेष

विंध्य पर्वत पर विराजमान मां भगवती महा त्रिपुर सुंदरी है वही भगवती षोडशी के रूप में भगवती कामाख्या के रूप में कामाख्या में तंत्रोक्त रात्रिसक्त अथवा...

तंत्र-स्रोत कोष

श्री कामाख्या तंत्र कवच

यस्य स्मरणमात्रेण योगिनी-डाकिनी-गणाः । राक्षस्यो विघ्नकारिण्यो याश्चान्या विघ्नकारिकाः ॥2॥ क्षुत्पिपासा तथा निद्रा तथान्ये ये च विघ्नदाः । दूरादपि...