Grihasth Tantra
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विंध्य स्थानं विंध्य निलयां विंध्य पर्वत वासिनी।
योगिनी योगमयां त्वां चंडिके प्रणमाम्यहं।।
तंत्र घटनाएं
वज्र कवच और पिशाच भाग – 02
By
Rudransh
29/11/2025
तंत्र घटनाएं
रक्षक ने बेहुदगी से आवाज लगाकर सभी को बाहर निकलने कहा। और उल्टा सीधा बोलने लगा। बालक बस एक हुंकार के साथ उस ओर देखा जहां से अनर्गल विषय बोला जा रहा...
श्री रुद्रांश-वाणी
प्रकृति के मध्य तंत्र स्थान
By
Rudransh
21/11/2025
श्री रुद्रांश-वाणी
विधान का पालन हुआ। बताये गये समय पर चिताभूमि थपर स्थित भगवती सती के हृदयपीठ पर विराजमान भगवान शिव के महा ज्योतिर्लिंग वैद्यनाथ धाम...
साधना सर्वस्व
चौंसठ योगिनी विशेष
By
Rudransh
21/11/2025
साधना सर्वस्व
विंध्य पर्वत पर विराजमान मां भगवती महा त्रिपुर सुंदरी है वही भगवती षोडशी के रूप में भगवती कामाख्या के रूप में कामाख्या में तंत्रोक्त रात्रिसक्त अथवा...
तंत्र-स्रोत कोष
श्री कामाख्या तंत्र कवच
By
Rudransh
21/11/2025
तंत्र-स्रोत कोष
यस्य स्मरणमात्रेण योगिनी-डाकिनी-गणाः । राक्षस्यो विघ्नकारिण्यो याश्चान्या विघ्नकारिकाः ॥2॥ क्षुत्पिपासा तथा निद्रा तथान्ये ये च विघ्नदाः । दूरादपि...
ब्रह्मपिशाच प्रपंच – भाग 1
ब्रह्मपिशाच प्रपंच-भाग-2
ब्रह्मपिशाच प्रपंच भाग-3
ब्रह्मपिशाच प्रपंच भाग-4
ब्रह्मपिशाच प्रपंच भाग-5
प्रकृति के मध्य तंत्र स्थान
चौंसठ योगिनी विशेष
श्री त्रिपुर सुंदरी चौंसठ योगिनी नामावली
श्री कामाख्या तंत्र कवच
बुधाष्टमी विशेष
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