Grihasth Tantra

Author: Rudransh

तंत्र घटनाएं

वज्र कवच और पिशाच भाग – 02

रक्षक ने बेहुदगी से आवाज लगाकर सभी को बाहर निकलने कहा। और उल्टा सीधा बोलने लगा। बालक बस एक हुंकार के साथ उस ओर देखा जहां से अनर्गल विषय बोला जा रहा था। कुछ ही क्षणों में ना वह रक्षक चुप हो गया वरन वह वहीं बैठ गया, अब कोई उस पर ध्यान ना देकर, बालक के समक्ष हाथ जोड़कर पुनः पुछा महाराज कृपा करें हम सब आपके समक्ष कुछ भी नहीं। हम पर दया करें व बालक को मुक्त करें, इस हेतु आप अपना परिचय दें।
बालक का शरीर काफी तेज कांपने लगा , जल के मध्य वह हुंकारे व

Read More
तंत्र घटनाएं

वज्र कवच और पिशाच

अपने सिद्ध स्थान पर हल्दी से एक छोटा सा यंत्र बनाया , उस यंत्र के ऊपर कपूर का चुरा चढ़ाया जिससे पुरा यंत्र ढक गया। यह हल्दी व कपूर‌ पूर्व अभिमंत्रित था। अब उस चावल व फुल को उसके मध्य स्थापित कर कुछ मंत्र पढ़़ना आरंभ किया। मंत्र पढ़ते कुछ समय बीता होगा, ऐसा लगा जैसे पुष्प में स्पंदन हुआ हल्का। फिर लगा चावल में हल्का स्पंदन हुआ।
सुखा हुआ पुष्प जो काला पड़ चुका था वो एकाएक गहरे रंग का होने लगा और उसी समय सोखा ने एक कपूर को दीपक से जला कर कुछ मंत्र बुदबुदाहट के साथ उस यंत्र पर डाल दिया। कपूर चुर्ण से बना वह यंत्र पुरा जल उठा

Read More
तंत्र-स्रोत कोष

श्री कामाख्या तंत्र कवच

यस्य स्मरणमात्रेण योगिनी-डाकिनी-गणाः । राक्षस्यो विघ्नकारिण्यो याश्चान्या विघ्नकारिकाः ॥2॥
क्षुत्पिपासा तथा निद्रा तथान्ये ये च विघ्नदाः । दूरादपि पलायन्ते कवचस्य प्रसादतः ॥3॥
निर्भयो जायते मर्त्यस्तेजस्वी भैरवोपमः । समासक्तमनाश्चापि जपहोमादिकर्मसु ॥
भवेच्च मन्त्र-तन्त्राणां निर्विघ्नेन सु-सिद्धये ॥4॥
~ अथ कवचम् ~
ॐ प्राच्यां रक्षतु मे तारा कामरुप-निवासिनी । आग्नेय्यां षोडशी पातु याम्यां धूमावती स्वयम् ॥5॥
नैर्ऋत्यां भैरवी पातु वारुण्यां भुवनेश्वरी । वायव्यां सततं पातु छिन्नमस्ता महेश्वरी ॥6॥

Read More
तंत्र-स्रोत कोष

श्री त्रिपुर सुंदरी चौंसठ योगिनी नामावली

औं विशालाक्ष्यै नमः
औं हुंकारायै नमः
औं बडवामुख्यायै नमः
औं हाहारवायै नमः
औं महाक्रूरायै नमः
औं क्रोधनायै नमः
औं भयाननायै नमः
औं सर्वज्ञायै नमः
औं तरलायै नमः
औं तारायै नमः
औं ऋग्वेदायै नमः
औं हयाननायै नमः
औं सारायै नमः
औं रससंग्राहायै नमः
औं सरवायै नमः
औं तालजङ्घ्यै नमः
औं रक्ताक्ष्यै नमः
औं करंकिन्यै नमः
औं विद्विजिह्वायै नमः

Read More
साधना सर्वस्व

चौंसठ योगिनी विशेष

विंध्य पर्वत पर विराजमान मां भगवती महा त्रिपुर सुंदरी है वही भगवती षोडशी के रूप में भगवती कामाख्या के रूप में कामाख्या में
तंत्रोक्त रात्रिसक्त अथवा तंत्रोक्त देवी सूक्त। इन दोनों के द्वारा भगवती का प्रबोधन किया जाता है, आवाहन किया जाता है। या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता – यह जो मंत्र आदि है जो कि श्री दुर्गा

Read More
श्री रुद्रांश-वाणी

प्रकृति के मध्य तंत्र स्थान

विधान का पालन हुआ। बताये गये समय पर चिताभूमि थपर स्थित भगवती सती के हृदयपीठ पर विराजमान भगवान शिव के महा ज्योतिर्लिंग वैद्यनाथ धाम के नाग पीठ पर उनके निमित्त समस्त विधानों को पूर्ण किया गया

Read More
तंत्र घटनाएं

ब्रह्मपिशाच प्रपंच भाग-5

तंत्रोक्त विधान से घर के एक हिस्से को ही अस्थाई शमशान का रूप दे दिया था। तंत्रोक्त चिताग्नि समान हवन कुंड पर पहला बलि मसान हेतु कबुतर का दिया और समस्त दिशा बंधित कर दिया। फिर अगले ही कुछ पल बाद अगली बलि स्थापित पिशाच हेतु किया गया।

Read More
तंत्र घटनाएं

ब्रह्मपिशाच प्रपंच भाग-4

रक्त पुष्प को भुतनी मुद्रा से जैसे ही समर्पित किया सुरा सुंदरी समक्ष पटल पर आ गयी। सुरा का अर्घ्य दे प्रणाम किया तथा आज की तंत्र युद्ध में सहायता हेतु प्रार्थना किया।
बंधन पुर्ण करके ब्रह्म पिशाच को पुनः खोला तथा उससे अंतिम बार वार्ता की।

Read More
तंत्र घटनाएं

ब्रह्मपिशाच प्रपंच भाग-3

तब तांत्रिकों द्वारा उनके निवास को विशेष तंत्र प्रक्रिया द्वारा बांधा गया। जिसमें पहले शमशानिक लांगूर विद्या का प्रयोग हुआ जिसके अंतर्गत युवा स्वतः मृत मर्कट के कपाल को शमशान में जाग्रत करके सिद्ध किया जाता है। कितने साधक इस साधना को करते समय मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं।

Read More
तंत्र घटनाएं

ब्रह्मपिशाच प्रपंच-भाग-2

कपाल दंड, श्यामा दंड, रूद्र दंड, पिशाच दंड, मसान दंड इत्यादि पंथ अनुसार इसके भेद होते हैं। सबकी अलग क्षमता और कार्य प्रणाली होती है।जिस दंड के साथ खप्पर भर दिया जायेगा,वह दंड कभी भी गृहस्थ के चौखट को नही लांघेगी , यह अघोर की मर्यादा है।

Read More