Grihasth Tantra

बुधाष्टमी विशेष

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चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी इस बार बुधवार को पड़ रही है। बुधवार की अष्टमी सूर्यग्रहण के समान कही गयी है। सूर्य ग्रहण में किया गया जप तप दान होम दस लाख गुणा फल देता है, वही फल बुधाष्टमी का भी है। इसे व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए।
इस बार रौद्र नामक संवत्सर का आगमन हो रहा है, उससे पहले की यह बुधाष्टमी है, इस दिन भगवती जगदंबा के सहित 64 योगिनी मातृकाओं का अवश्य पूजन करें तथा गुग्गुल घी से हवन करें।
गृहस्थ तंत्र परिवार द्वारा इस दिव्य तिथि के दिन संपुट नवचंडी सहित 64 योगिनी पीठ पर पूजन व हवन का आयोजन आगामी संवत्सर में साधकों की पूर्णा रक्षा व निर्विघ्नता हेतु किया जा रहा। भगवती की 64 प्रमुख योगिनी मातृकाएं सबसे उग्र व क्रियाशील रहतीं हैं, इनके प्रसन्नता से सर्वत्र रक्षा व विजय प्राप्त होगी। अनुष्ठान उपरांत प्रसाद आपको अगले 15 दिनों में भेजा जायेगा।। भगवती 64 योगिनी को चढ़ा हुआ सिंदुर/रोली जायेगा, अपने मुख्य द्वार पर उससे 9 जगह बिंदु बना दीजियेगा तथा बाकी का प्रयोग तिलक लगाने में हर कोई कर सकता है।

 

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चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी इस बार बुधवार को पड़ रही है। बुधवार की अष्टमी सूर्यग्रहण के समान कही गयी है। सूर्य ग्रहण में किया गया जप तप दान होम दस लाख गुणा फल देता है, वही फल बुधाष्टमी का भी है। इसे व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए।
इस बार रौद्र नामक संवत्सर का आगमन हो रहा है, उससे पहले की यह बुधाष्टमी है, इस दिन भगवती जगदंबा के सहित 64 योगिनी मातृकाओं का अवश्य पूजन करें तथा गुग्गुल घी से हवन करें।
गृहस्थ तंत्र परिवार द्वारा इस दिव्य तिथि के दिन संपुट नवचंडी सहित 64 योगिनी पीठ पर पूजन व हवन का आयोजन आगामी संवत्सर में साधकों की पूर्णा रक्षा व निर्विघ्नता हेतु किया जा रहा। भगवती की 64 प्रमुख योगिनी मातृकाएं सबसे उग्र व क्रियाशील रहतीं हैं, इनके प्रसन्नता से सर्वत्र रक्षा व विजय प्राप्त होगी। अनुष्ठान उपरांत प्रसाद आपको अगले 15 दिनों में भेजा जायेगा।। भगवती 64 योगिनी को चढ़ा हुआ सिंदुर/रोली जायेगा, अपने मुख्य द्वार पर उससे 9 जगह बिंदु बना दीजियेगा तथा बाकी का प्रयोग तिलक लगाने में हर कोई कर सकता है।

 

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