Description
यह मणिबंध भगवती के प्रमुख लांगूल वीर के लांगूलास्त्र से अभिमंत्रण किया गया है। पैशाचिक बाधा सहित शरीर में उत्साह की कमी, ऊर्जा की कमी , रक्त संबंधित रोग आदि के निवारण हेतु श्रेष्ठ रक्षण बंध है। प्राप्त होने पर किसी भी मंगलवार को इसका पुनः पूजन यथा गौ दुग्ध से अभिषेक , शुद्ध जल से अभिषेक, धुप दीप नैवेद्य तथा कपूर से आरती दिखा कर तब धारण करें। अगर अगर कभी चांदी की तार टुट जाये तो उसे पुनः बनवाकर उपरोक्त विधि से स्नान करवाकर धारण कर सकतें हैं।


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